यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

उर्वरक तथा कीटनाशक

उर्वरक ऐसे यौगिक हैं जो विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिए पौधों को दिए जाते हैं। दो प्रकार के उर्वरक होते है - जैविक तथा अजैविक। जैव उर्वरक कार्बन पर आधारित होते हैं तथा पत्तियों, गोबर एवं पौधों के यौगिक होते हैं। अजैविक उर्वरक में साधारण अजैविक रसायन होते हैं। उर्वरकों में उपस्थित कुछ सामान्‍य पोषक नाइट्रोजन, फास्‍फोरस तथा पोटैशियम हैं। उनमें कैल्सियम, सल्‍फर तथा मैगनेसियम जैसे द्वितीय, पौध पोषक तत्‍व भी होते है। कुछ विशेष उर्वरकों में बोरोन, क्‍लोरीन, मैंगनीज, लौह, जिम, तांबा तथा मोलिबडीनम जैसे पौधों के पोषक तत्‍व के लिए ट्रेस तत्‍व अथवा सूक्ष्‍म पोषक तत्‍व होते हैं। यह महत्‍वपूर्ण है कि किसान अधिक अथवा अनुचित इस्‍तेमाल के जरिए क्षति से बचने के लिए कतिपय फसल में उपयोग में लाए जाने वाले उर्वरकों के सही मिश्रण के बारे में जाने।

जबकि उर्वरक पौध की वृद्धि में मदद करते हैं तथा कीटनाशक कीटों से रक्षोपाय के रूप में कार्य करते हैं। मूल रूप से कीटनाशक कीट की क्षति को रोकने, नष्‍ट करने, दूर भगाने अथवा कम करने के लिए एक पदार्थ अथवा पदार्थों का मिश्रण होता है। कीटनाशक रसायनिक पदार्थ अथवा वाइरस, बैक्‍टीरिया, कीट भगाने वाले खर-पतवार तथा कीट खाने वाले कीटों, मछली, पछी तथा स्‍तनधारी जैसे जैविक होते हैं। इस भाग में कीटनाशक उन कीटनाशकों से संबंधित हैं जिनमें फासफैमीडोन, लिंडेन, फ्लोरोपाइरीफोस, हेप्‍टाक्‍लोर तथा मैलेथियान जैसे रासायनिक पदार्थ होते हैं। बहुत से कीटनाशक मानव के लिए जहरीले होते हैं। सरकार ने कुछ कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया है जबकि अन्‍य के इस्‍तेमाल को विनियमित किया गया है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 14-01-2011